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Bihar Flood: गंडक के कटाव से रेवहिया में तबाही, 100 से ज्यादा घर उजड़े; अब स्कूल पर मंडराया खतरा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पश्चिम चंपारण के बगहा में गंडक नदी का कटाव तेज हो गया है। रेवहिया गांव में 100 से ज्यादा घर प्रभावित हैं और अब स्कूल भवन पर भी खतरा मंडरा रहा है।

बगहा, 19 अगस्त। पश्चिम चंपारण के बगहा अनुमंडल में बाढ़ का पानी कम होने के साथ ही गंडक नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए नई मुसीबत बन गया है। मधुबनी प्रखंड के धनहा क्षेत्र स्थित रेवहिया गांव में नदी की तेज धारा लगातार जमीन को निगल रही है। कटाव की चपेट में अब तक 100 से अधिक घर आ चुके हैं। कई परिवारों के सामने अपना आशियाना बचाने की जगह घर का जरूरी सामान सुरक्षित निकालने की चुनौती खड़ी हो गई है।

गांव में स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कुछ परिवार खुद अपने घरों को तोड़कर ईंट, लकड़ी, दरवाजे और दूसरे सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि अगर नदी की धारा इसी रफ्तार से जमीन काटती रही तो आने वाले समय में उनके बचे हुए घर भी सुरक्षित नहीं रह पाएंगे।

रेवहिया में कभी जहां पक्के और कच्चे मकानों की कतार दिखाई देती थी, वहां अब कटाव से बदला हुआ भू-दृश्य नजर आ रहा है। नदी किनारे की जमीन लगातार दरक रही है। घरों के आसपास की मिट्टी खिसकने से लोगों के बीच दहशत बनी हुई है। कई परिवार अपने स्तर पर सामान समेटकर सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं।

घरों के बाद अब स्कूल पर संकट

गंडक का कटाव अब केवल रिहायशी इलाकों और खेतों तक सीमित नहीं है। नदी की धार गांव के स्कूल के बेहद करीब पहुंच गई है। विद्यालय की बाउंड्री का एक हिस्सा कटाव की वजह से पहले ही नदी में समा चुका है। अब स्कूल भवन के आसपास भी जमीन कट रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर बच्चों की पढ़ाई होती है, वहां अब हर दिन खतरा बढ़ रहा है। यदि कटाव को तत्काल नहीं रोका गया तो स्कूल भवन भी इसकी चपेट में आ सकता है। ऐसा होने पर बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी और पूरे इलाके के विद्यार्थियों पर इसका असर पड़ सकता है।

स्कूल के आसपास कटाव बढ़ने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन केवल कटावरोधी सामग्री उपलब्ध कराने तक सीमित न रहे, बल्कि नदी की धारा को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी काम शुरू कराया जाए।

किसानों की जमीन भी नदी में समा रही

गंडक की तेज धारा ने गांव के आसपास के खेतों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। किसानों की उपजाऊ जमीन लगातार नदी की ओर खिसक रही है। जिन खेतों पर परिवारों की आजीविका निर्भर थी, उनके अस्तित्व पर संकट पैदा हो गया है।

ग्रामीणों के लिए यह नुकसान सिर्फ जमीन का नहीं है। खेत खत्म होने का सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ने वाला है। एक तरफ घर बचाने की चिंता है और दूसरी तरफ खेती की जमीन गंवाने का डर। ऐसे में गांव के लोगों के सामने विस्थापन और आजीविका दोनों का संकट एक साथ खड़ा हो गया है।

बाढ़ का पानी उतरते ही बढ़ा कटाव

गंडक नदी में बाढ़ के दौरान पानी का दबाव बढ़ने के बाद कई इलाकों में नदी के किनारे की जमीन कमजोर हो जाती है। पानी कम होने के बाद कई स्थानों पर कटाव तेज हो जाता है। पश्चिम चंपारण में गंडक के किनारे बसे इलाकों में यह समस्या हर साल ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनती है।

इस बार रेवहिया में कटाव की स्थिति ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नदी अब गांव की आबादी और स्कूल के बेहद करीब पहुंच चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते मजबूत कटावरोधी काम नहीं हुआ तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।

मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम

कटाव की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया है। कटाव रोकने के लिए बोरियों समेत आवश्यक सामग्री मौके पर पहुंचाई गई है। विभागीय स्तर पर नदी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि केवल बोरियां और दूसरी सामग्री पहुंचा देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की धारा जिस तेजी से जमीन काट रही है, उसे देखते हुए तत्काल फ्लड फाइटिंग और कटावरोधी कार्य शुरू करना जरूरी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि काम में किसी तरह की देरी नहीं की जाए। उनका कहना है कि नदी अब घरों से आगे बढ़कर स्कूल की चौखट तक पहुंच चुकी है। ऐसे में यदि कटाव को रोकने में कुछ और दिन लग गए तो नुकसान को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।

ग्रामीण खुद बचा रहे अपने आशियाने का सामान

रेवहिया में कटाव की स्थिति ने लोगों को अपने घरों की सुरक्षा के लिए खुद कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। कई परिवार मकान के उन हिस्सों को तोड़ रहे हैं, जिन्हें नदी की चपेट में आने का खतरा है। ईंट, लकड़ी, दरवाजे और घर में रखे जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा रहा है।

जिन लोगों ने वर्षों की मेहनत से अपना घर बनाया था, उनके लिए उसे खुद तोड़ना बेहद पीड़ादायक है। लेकिन नदी के लगातार बढ़ते खतरे के बीच ग्रामीणों के पास अपने सामान को बचाने के अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं दिखाई दे रहा है।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बाढ़ और कटाव के दौरान अस्थायी इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं होने के कारण समस्या दोबारा सामने आ जाती है। उनका कहना है कि गंडक के किनारे संवेदनशील स्थानों की पहचान कर पहले से मजबूत कटावरोधी व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।

रेवहिया में फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता घरों और स्कूल को सुरक्षित करना है। इसके साथ खेतों को बचाने के लिए भी तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

गंडक की धारा अगर इसी तरह आगे बढ़ती रही तो आने वाले दिनों में नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। ग्रामीणों की निगाह अब प्रशासन और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। लोगों को उम्मीद है कि कटावरोधी काम युद्धस्तर पर शुरू होगा और नदी की धारा को आबादी से दूर रखने के लिए प्रभावी उपाय किए जाएंगे।

रेवहिया की मौजूदा तस्वीर बाढ़ के बाद की उस दूसरी त्रासदी को सामने ला रही है, जिसमें पानी उतरने के बाद भी लोगों का संकट खत्म नहीं होता। घर बचाने की जद्दोजहद, खेतों के कटने का दर्द और अब स्कूल पर मंडराता खतरा यह बताने के लिए काफी है कि गंडक का कटाव यहां रहने वाले लोगों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन चुका है।

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बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन रेवहिया का संकट नहीं

रेवहिया में गंडक नदी का कटाव यह बताता है कि बाढ़ की त्रासदी पानी घटने के साथ खत्म नहीं होती। कई बार असली संकट उसके बाद शुरू होता है। नदी किनारे की कमजोर जमीन कटती है और देखते ही देखते घर, खेत और सार्वजनिक संस्थान खतरे में आ जाते हैं।

100 से ज्यादा घरों के प्रभावित होने की स्थिति बेहद गंभीर है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कटाव अब स्कूल तक पहुंच गया है। शिक्षा का केंद्र यदि नदी की चपेट में आता है तो इसका असर केवल एक भवन पर नहीं, बल्कि पूरे इलाके के बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा।

ऐसे हालात में प्रशासन को तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान की दिशा में भी काम करना होगा। बोरियां और अस्थायी कटावरोधी उपाय तत्काल राहत दे सकते हैं, लेकिन संवेदनशील इलाकों में मजबूत और वैज्ञानिक तरीके से तट संरक्षण की जरूरत है।

रेवहिया के लोगों ने अपना घर बचाने की उम्मीद में खुद सामान निकालना शुरू कर दिया है। यह दृश्य प्रशासन के लिए चेतावनी होना चाहिए। नदी की धारा को रोकने में देरी का मतलब केवल कुछ और जमीन का नुकसान नहीं, बल्कि कई परिवारों के पूर्ण विस्थापन का खतरा हो सकता है।

अब जरूरत बयान या निरीक्षण से आगे बढ़कर जमीन पर तेज कार्रवाई की है। घर, खेत और स्कूल—तीनों को बचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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